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UP हिंसा: पुलिस की कार्रवाई पर भड़का ICJ, सरकार से की जांच की मांग

  • पीड़ितों के इंटरव्यू पर तैयार हुआ ब्रीफिंग पेपर
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट में आज से शुरू होगी सुनवाई

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान में उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा के मामले में इंटरनेशनल कमिशन ऑफ जूरिस्ट्स (आईसीजे) ने भारत सरकार से जांच कराने की मांग की है. आईसीजे ने कहा कि भारत सरकार को उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई की जांच करानी चाहिए.

गवाहों और पीड़ितों के साथ फर्स्टहैंड इंटरव्यू के आधार पर तैयार ब्रीफिंग पेपर में आईसीजे ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर की गई गोलीबारी, आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज के कारण 19 लोगों की मौत हुई और 199 लोग घायल हुए. यह घटना 11 दिसंबर के बाद सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई. पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया.

आईसीजे के महासचिव सैम जरीफी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शांतिपूर्ण प्रदर्शकारियों की काफी संख्या में मौत हुई है. यह मॉरल पुलिसिंग और मानवाधिकारियों के अंतराराष्ट्रीय मानकों के उल्लंघन का मामला है. राज्य और केंद्र सरकार को प्रदर्शन के दौरान हुई मौत की जांच करानी चाहिए. इसके साथ ही पीड़ितों और उनके परिवार को कानूनी मदद मिलनी चाहिए.

आईसीजे ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई में घायल लोगों को मेडिकल लीगल प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है. यहां तक मृतकों के परिवार वालों को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. घायलों को जीवन जीने और स्वतंत्रता का अधिकार है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षित है.

आईसीजे के महासचिव सैम जरीफी ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने गोली चलाकर, आंसू गैस के गोले दागकर और लाठीचार्ज का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उल्लंघन किया है. पुलिस और सरकार को जीवन जीने और स्वतंत्रता के अधिकार का ख्याल रखना चाहिए. पुलिस की बर्बर कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

इलाहाबाद हाई कोर्ट में आज से सुनवाई

उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में आज यानी 16 जनवरी से सुनवाई हो रही है. यह सुनवाई मुंबई के वकील अजय कुमार के पत्र के आधार पर हो रही है. इस पत्र के बाद हाई कोर्ट ने पूरे मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ कई जनहित याचिकाएं भी दायर हैं.

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