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e-साहित्य आजतक में आए महाभारत के स्टार्स, सुनाए शूट‍िंग से दिलचस्प किस्से

बी आर चोपड़ा की महाभारत और रामानंद सागर की रामायण की दर्शकों के दिलों में एक अलग जगह और पहचान है. रामानंद सागर की रामायण की ही तरह बी आर चोपड़ा की महाभारत को भी जनता से खूब प्यार मिला था. ये शो कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन में वापस आया और पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बन गया.

शुक्रवार को e-साहित्य आजतक में एंकर मीनाक्षी कंडवाल ने महाभारत की द्रौपदी यानी रूपा गांगुली और युधिष्ठिर यानी गजेन्द्र चौहान से खास बातचीत की. इस मौके पर रूपा और गजेन्द्र ने अपने शो के पॉपुलर होने और शूटिंग के दिनों के बारे में बात की.

महाभारत देखने नहीं सीखने की चीज है

सीरियल महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाकर फेमस हुए एक्टर गजेन्द्र चौहान ने आज की पीढ़ी से महाभारत को मिल रहे प्यार के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि 1988 में महाभारत लॉकडाउन की वजह बना था और आज लॉकडाउन महाभारत की वजह बना है. मैं इस बात का आभारी हूं कि सभी को दोबारा हमारा शो देखने को मिल रहा है.

गजेन्द्र चौहान ने कहा- महाभारत कोई देखने की चीज नहीं बल्कि सीखने की चीज है. आज की पीढ़ी सबकुछ देखकर सीखती है ऐसे में रामायण-महाभारत का दोबारा प्रसारण होना किसी वरदान से कम नहीं है.

असल जिंदगी में द्रौपदी से मिलती थीं रूपा

रूपा गांगुली से e-साहित्य आजतक की एंकर मीनाक्षी कंडवाल ने पूछा कि द्रौपदी के किरदार की किन शक्तियों और कमियों को उन्होंने देखा और उनके बारे में सोचा. रूपा गांगुली ने कहा कि वे बचपन से ही थोड़ी ताकतवर और थोड़ी शर्मीली थीं. इसीलिए वे द्रौपदी के किरदार से इतनी अच्छी तरह जुड़ पाईं. शूटिंग के लिए उन्होंने महाभरत को और द्रौपदी के किरदार को दोबारा पढ़ा था और तब उन्हें एहसास हुआ था कि ये स्कूल में पढ़े महाभारत से अलग है.

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रूपा ने कहा कि नारी, भारत का अंग और रूप है. भारत को हम माता बोलते हैं जबकि अन्य देशों में लोग अपने देश को पिता बुलाते हैं. हमने शुरू से ही भारत को अपनी मां माना है. अलग-अलग देवियों के रूप में उसकी पूजा भी की है.

चीरहरण सीन में असल में गिर पड़ी थी रूपा

रूपा गांगुली ने महाभारत की शूटिंग के किस्से भी सुनाएं. उन्होंने बताया कि चीरहरण वाले सीन को शूट करते हुए उन्होंने जो कुछ किया वो एक्टिंग नहीं बल्कि सच था. रूपा ने बताया कि उन्होंने उस सीन में अपनी जान लगा दी थी. जब दुशासन, द्रौपदी को घसीटते हुए लेकर जाता है, उस सीन में रूपा ने सही में खुद को खिंचने से बचाने की कोशिश की थी. इसकी वजह से दुशाशन बने एक्टर को काफी दिक्कत हुई थी और उन्हें सही में पसीना आ गया था.

इतना ही नहीं जब दुशासन के साथ जाते हुए द्रौपदी सीन में गिरी तो वो सच में हुआ था. ऐसी एक्टिंग करने को नहीं कही गई थी बल्कि रूपा उस सीन में इतनी घुल गई थीं कि गिर पड़ी थीं.

सबसे ज्यादा खाना खाते थे दुर्योधन

रूपा गांगुली ने बताया कि शूटिंग के समय पर दुर्योधन का किरदार निभाने वाले एक्टर पुनीत इस्सार सबसे ज्यादा खाना खाया करते थे. वो किसी का इंतजार नहीं करते थे और खुद ही खाना खाने लगते थे.

महाभारत में लगाई थी जान

रूपा गांगुली ने बताया कि वे दो साल तक महाभारत सीरियल में काम करती रही थीं और उन्होंने इस पूरे समय के एक-एक दिन में ना जाने कितना काम किया था. रूपा सुबह 5 बजे स्टूडियो शूटिंग के लिए जाती थीं और रात को देर से आती थीं. उन्होंने बताया कि महाभारत से जुड़े सभी लोगों ने इसमें जान लगाकर काम किया था. साथ ही सभी लोग एक दूसरे की मदद भी किया करते थे.

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राज के दौर की राजनीति और महाभारत में क्या है समानता?

रूपा गांगुली से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि आज के समय में होने वाली राजनीति और महाभारत के समय में होने वाली राजनीति में समानता है. रूपा ने कहा कि उस समय लोग न्याय-अन्याय, सत्य-असत्य के लिए लड़ रहे थे. आज के समय में हम प्रकृति से लड़ रहे हैं. कोरोना भारत में आया है. हमें बनाया नहीं है. पूरी दुनिया इससे लड़ रही है. पश्चिम बंगाल में आए तूफ़ान को हम प्रकृति की बात मानेंगे. इससे सभी का बुरा हाल है.

उन्होंने आगे कहा-भारत की हमेशा से संस्कृति रही है कि हाथ जोड़कर नमस्ते करें. एक दूसरे से हटकर चले या खड़े हों. सफाई रखें. इससे आप भी खुश रहेंगे और दूसरों को भी खुशी मिलेगी. भारत की संस्कृति ने हमें सब सिखाया है. महाभारत ने हमेशा से हमें संदेश दिया है कि प्रकृति सबसे ऊपर है.

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