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BJP सांसद ने GDP थ्योरी पर उठाए सवाल, कहा- बाइबिल-रामायण मानने की जरूरत नहीं

  • सांसद का बयान आलोचकों को जवाब माना जा रहा है
  • 6 वर्षों में सबसे खराब स्तर पर है जीडीपी (4.5 फीसदी)

सकल घरेलू उत्पाद दर (जीडीपी) गिरने पर मची बहस के बीच भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने इसके महत्व पर ही सवाल उठा दिया है. उन्होंने सोमवार को लोकसभा में कहा कि जीडीपी का भविष्य में ज्यादा उपयोग नहीं होने वाला है, इसे बाइबिल, महाभारत या रामायण मानने की जरूरत नहीं.

वित्त मंत्री भी दे चुकी हैं नसीहत

निशिकांत दुबे का यह बयान आर्थिक संकेत के खराब होने पर मोदी सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को जवाब माना जा रहा है. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सरकार के आलोचकों को नसीहत दे चुकीं हैं. निशिकांत दुबे ने लोकसभा में कहा कि जीडीपी के रूप में देश के विकास को मापने का पैमाना 1934 में आया, इससे पहले ऐसा कोई पैमाना नहीं हुआ करता था. जीडीपी को बाइबिल, रामायण या महाभारत मान लेना सत्य नहीं है.

सतत आर्थिक विकास का महत्व है

झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि जीडीपी की तुलना में सतत आर्थिक विकास कहीं ज्यादा महत्व रखता है. उन्होंने कहा कि जीडीपी की जगह यह जानना जरूरी है कि आम लोगों का सतत आर्थिक विकास हो रहा है या नहीं. मोदी सरकार इस दिशा में सफलतापूर्वक काम कर रही है.

कई अर्थशास्त्रियों के बयान जिक्र किया

निशिकांत दुबे ने जीडीपी की आधुनिक अवधारणा को स्थापित करने वाले अमेरिकी अर्थशास्त्री साइमन कुज्नेत्स व अन्य अर्थशास्त्रियों के बयानों का भी जिक्र किया. लोकसभा में सांसद निशिकांत दुबे का बयान ऐसे समय आया है, जब मोदी सरकार पिछले 6 वर्षों में सबसे खराब जीडीपी (4.5 फीसदी) को लेकर आलोचनाएं झेल रही है.

राहुल बजाज ने की थी आलोचना

देश की अर्थव्यवस्था पिछले काफी समय से सुस्ती की शिकार है. हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान जब उद्योगपति राहुल बजाज ने मोदी सरकार की आलोचना करते समय डरने की बात कही तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का ट्वीट काफी चर्चा में रहा. उन्होंने निशाना साधते हुए कहा था कि जवाब हासिल करने का बेहतर तरीका अपनाने की जगह सिर्फ अपना नजरिया रखने या इस तरह ध्यानाकर्षण करने से देशहित को नुकसान हो सकता है. अब भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने जीडीपी थ्योरी खारिज कर इसके महत्व पर ही सवाल उठा दिया है. (इनपुट-IANS)

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