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फैक्ट चेक: हिंदू धर्म ग्रंथों में बदलाव नहीं, लाइब्रेरी में पढ़ रहे ये मुस्लिम छात्र

हिंदू और मुस्लिम धार्मिक किताबों के साथ एक लाइब्रेरी में बैठे कुछ मुस्लिम युवाओं की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है. इसके साथ दावा किया जा रहा है कि वे पवित्र हिंदू ग्रंथों को फिर से लिख रहे हैं. यह भी दावा किया जा रहा है कि इसी तरह वेद, पुराण और उपनिषदों को “बदल कर दूषित” किया जा रहा है.

फेसबुक पर वायरल इसी तरह की एक पोस्ट में लिखा गया है, “देखो और ध्यान दो और क्या हो रहा है हमारे देश में. हमारे धर्म ग्रंथों में मिलावट करने का कार्य जोरों से चल रहा है,,,,आने वाले 20 साल बाद हमारी अगली पीढ़ियां ये मिलावटी वेद, पुराण, उपनिषद पढ़ेंगे।”

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इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा गलत है. ये तस्वीर हैदराबाद में एक मदरसे में खींची गई है. तस्वीर में दिख रहे मुस्लिम छात्र इस्लाम और हिंदू धर्म की सामान्य विशेषताओं को समझने के लिए हिंदू धर्म ग्रंथों का अध्ययन कर रहे हैं.

पोस्ट के कमेंट बॉक्स में कुछ यूजर्स ने “किताब जिहाद” बताया तो कुछ ने केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की. कुछ फेसबुक पोस्ट के आर्काइव यहां , यहां और यहां देखे जा सकते हैं.

इस पोस्ट में तस्वीर में दिख रहे छात्रों के काम की ​तुलना ब्रिटिश इतिहासकार टीबी मैकाले और पश्चिमी शिक्षाविद् मैक्स मूलर के काम से की गई है. चूंकि, यह एकेडेमिक व्याख्या और राय का विषय है, इसलिए हम उस पर गौर नहीं कर रहे हैं.

हमारी पड़ताल

रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमें ‘द हिंदू ’ की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें इसी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है. अप्रैल, 2014 की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ये तस्वीर हैदराबाद के एक इस्लामी शिक्षण संस्थान के पुस्तकालय की है, जहां छात्र इस्लाम और हिंदू धर्म में सामान्य विशेषताओं को समझने के लिए वेदों का अध्ययन करते हैं.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ये लाइब्रेरी अल महादुल आली अल इस्लामी मदरसा की है और यहां पर दूसरे धर्मों के बारे में 1,000 से ज्यादा किताबें हैं. ये तस्वीर ‘द हिंदू’ के फोटोग्राफर जी रामकृष्ण ने खींची थी. तस्वीर के कैप्शन के मुताबिक, “इस्लाम और हिंदू धर्म की सामान्य विशेषताएं समझने के लिए वेदों का अध्ययन करते अल महादुल आली अल इस्लामी के छात्र. इस लाइब्रेरी में दूसरे धर्मों के बारे में 1,000 से ज्यादा किताबें हैं.”

ज्यादा जानकारी के लिए हमने इस संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर ओमान आबिदीन से संपर्क किया. उन्होंने इस बात की पुष्टि ​की कि तस्वीर उन्हीं के लाइब्रेरी की है.

आबिदीन ने बताया, “अल महादुल आली अल इस्लामी मदरसा एक इस्लामिक रिसर्च इंस्टीट्यूट है. हमारे यहां ‘स्टडीज ऑफ इंडियन स्क्रिप्चर’ नाम का एक विभाग है, जहां छात्रों को हिंदू धर्म के बारे में समझ प्रदान की जाती है. हम अपने छात्रों को पढ़ाने के लिए दूसरे धर्मों के विद्वानों को भी आमंत्रित करते हैं ताकि उन्हें हर धर्म की सबसे अच्छी समझ मिल सके.”

उन्होंने कहा, “एक बार ‘द हिंदू’ की एक टीम ने हमारे संस्थान का दौरा किया था. वे हमारी किताबों का कलेक्शन देखकर हैरान रह गए. ये तस्वीर उसी समय खींची गई थी. इस समय हमारे यहां दूसरे धर्मों के बारे में करीब 1500 किताबें हैं.”

जाहिर है कि वायरल पोस्ट में मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू ग्रंथों को बदलने का दावा गलत है. ये तस्वीर हैदराबाद के अल महादुल आली अल इस्लामी मदरसे की है, जहां हिंदू धर्म और इस्लाम के बीच सामान्य विशेषताएं समझने के लिए छात्र हिंदू धर्म ग्रंथों का अध्ययन करते हैं.

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