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केंद्र ने गुजरात सरकार के श्रम कानून संशोधन को दी मंजूरी

  • कोरोना की वजह से कई राज्यों ने श्रम कानून में किए बदलाव
  • 100 कर्मचारियों वाले फर्म से जुड़े बदलाव को केंद्र की मंजूरी
  • उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश का बदलाव को लेकर मंजूरी लेना बाकी

कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से तबाह हुई अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की कवायद में देश की कई राज्य सरकारों ने श्रम कानूनों में फेरबदल कर दिया. श्रम कानूनों में फेरबदल करने वालों में गुजरात भी शामिल है. शुक्रवार को केंद्र सरकार ने गुजरात सरकार की ओर से किए गए श्रम कानूनों में बदलाव को स्वीकार कर लिया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम में गुजरात सरकार के संशोधन को अनुमोदित कर दिया है. गुजरात सरकार की ओर से किया गया संशोधन 100 कर्मचारियों तक वाले फर्मों को काम पर रखने या काम से निकालने की अनुमति देता है.

केंद्र ने राज्य सरकार के काम के घंटे को कम करने के लिए बरकरार रखा है. केंद्र की सहमति के बाद काम के घंटे को विनियमित करने के लिए फैक्ट्रीज एक्ट में संशोधन को लेकर मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है.

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गुजरात के इतर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को अपने श्रम कानूनों में कुछ संशोधनों के लिए केंद्र से मंजूरी लेना है.

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इससे पहले उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तर्ज पर गुजरात की विजय रुपाणी सरकार ने भी श्रम कानूनों में बदलाव कर दिया. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी पिछले दिनों श्रम कानूनों में बदलाव के बारे कहा, ‘कम से कम 1,200 दिनों के लिए काम करने वाली सभी नई परियोजनाओं या पिछले 1,200 दिनों से काम कर रही परियोजनाओं को श्रम कानूनों के सभी प्रावधानों से छूट दी जाएगी. कंपनियों को आकृषित करने के लिए यह बदलाव किया गया है.’

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रुपाणी ने कहा कि नए उद्योगों के लिए 7 दिन में जमीन आवंटन की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा. नए उद्योगों को काम शुरू करने के लिए 15 दिन के भीतर हर तरह की मंजूरी प्रदान की जाएगी. नए उद्योगों को दी जाने वाली छूट उत्पादन शुरू करने के अगले दिन से 1200 दिनों तक जारी रहेगी.

उन्होंने कहा कि चीन से काम समेटने वाली जापानी, अमेरिकी, कोरियाई और कई यूरोपियन कंपनियों को अपने यहां लाने का लक्ष्य है. गुजरात ने नए उद्योगों के लिए 33 हजार हेक्टेयर भूमि को चिन्हित किया है. नए उद्योगों के रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस आदि की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है.

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नए उद्योगों को न्यूनतम मजदूरी एक्ट, औद्योगिक सुरक्षा नियम और कर्मचारी मुआवजा एक्ट का पालन करना होगा. उद्योगों को लेबर इंस्पेक्टर की जांच और निरीक्षण से मुक्ति कर दी गई है. अपनी सुविधानुसार कंपनियों को अपने उद्योगों को प्रदेश में शिफ्ट में परिवर्तन करने का अधिकार दिया गया है.

इसी तरह गोवा, महाराष्ट्र और ओडिशा की सरकार ने भी 1948 के कारखानों अधिनियम के तहत श्रम कानूनों में ढील देते हुए कारखानों में कार्य करने की पाली 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने की अनुमति दे दी.

बदलाव पर विपक्ष हमलावर

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की ओर से आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए किए गए संरचनात्मक श्रम सुधारों का समर्थन किया. राज्य सरकार द्वारा लाए गए व्यापक श्रम कानून में बदलाव और छूट का समर्थन किया. हालांकि विपक्ष इसके लेकर लगातार हमलावर है.

बदलाव को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई मानवाधिकारों को रौंदने का बहाना नहीं हो सकता. यहां तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने भी श्रम कानूनों में किए जा बदलाव को लेकर अपना विरोध जताया है.

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